| बाबा नीम करौली के अनन्य भक्त राकेश अग्निहोत्री, डॉ. बृजेश श्रीवास्तव, दामोदर राजावत और शरद श्रीवास्तव ने नौकुचियाताल स्थित भक्ति माँ (मोनी माँ) के आश्रम का दर्शन किया। चारों ओर हरियाली से घिरे इस शांत और मनमोहक स्थल पर आध्यात्मिक वातावरण मन को सहज ही आकर्षित करता है। आश्रम परिसर में हनुमान जी की विशाल प्रतिमा, भक्ति माँ का मंदिर और उसके नीचे स्थित विशाल आश्रम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। यहाँ बाबा नीम करौली की स्मृतियों को संजोए एक प्रदर्शनी भी है, जिसमें भक्ति माँ की वर्षों की सेवा, साधना और समर्पण से जुड़ी अनेक दुर्लभ तस्वीरें देखने को मिलती हैं। आश्रम में आयोजित भंडारे ने इस आध्यात्मिक अनुभव को और भी आत्मीय बना दिया। इस दुर्लभ और आध्यात्मिक स्थान के दर्शन का श्रेय प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री वर्षा श्रीवास्तव को देते हैं, जिनके माध्यम से श्री हरिश जोशी से मुलाकात हुई। श्री जोशी ने आश्रम की महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए पूरे परिसर का दर्शन कराया। साथ ही भक्ति माँ के सुपुत्र से भी बातचीत का अवसर मिला, जिनसे मोनी माँ के जीवन, सेवा और साधना से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त हुईं। यह यात्रा श्रद्धा, सेवा और बाबा नीम करौली की स्मृतियों से जुड़ा अविस्मरणीय अनुभव रही। |
नौकुचियाताल। बाबा नीम करौली महाराज की अनन्य सेविका रहीं श्री भक्ति मां, जिन्हें श्रद्धालु प्रेम से मोनी मां के नाम से जानते हैं, ने अपना संपूर्ण जीवन सेवा, साधना, त्याग और आध्यात्मिक समर्पण को समर्पित कर दिया। बाबा नीम करौली के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा और 62 वर्षों तक मौन रहकर की गई सेवा आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। नौकुचियाताल स्थित उनका आश्रम आज भक्तों के लिए महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र के रूप में जाना जाता है।
बताया जाता है कि बाबा नीम करौली महाराज का जन्म अनंत चतुर्दशी के दिन वर्ष 1900 में हुआ था। उनका जीवन सेवा, भक्ति और मानव कल्याण के संदेश से जुड़ा रहा। इसी आध्यात्मिक परंपरा से जुड़कर भक्ति मां ने भी अपना जीवन लोकसेवा और साधना के लिए समर्पित किया। उन्होंने लंबे समय तक मौन व्रत का पालन करते हुए बाबा की सेवा की और उनके सान्निध्य में आध्यात्मिक जीवन को नई दिशा दी।
भक्ति मां का जीवन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने सेवा, अनुशासन, त्याग और गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण को अपने जीवन का आधार बनाया। कहा जाता है कि उन्होंने 62 वर्षों तक मौन रहकर साधना की और इस दौरान निरंतर सेवा कार्यों में सक्रिय रहीं। वर्ष 2013 के अंतिम दिनों में उन्होंने इस संसार से विदा ली, लेकिन उनकी साधना और सेवा की स्मृतियां आज भी श्रद्धालुओं के मन में जीवंत हैं।
नौकुचियाताल स्थित भक्ति मां के आश्रम में प्रतिदिन श्रद्धालुओं का आगमन होता है। यहां लोग आध्यात्मिक शांति और आशीर्वाद की अनुभूति के लिए पहुंचते हैं। आश्रम परिसर में गौसेवा, हिंदू संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना से जुड़े कार्यों को भी महत्व दिया जाता है। बाबा नीम करौली के भक्तों की मान्यता है कि कैंची धाम की यात्रा के साथ मोनी मां के धाम पहुंचना भी आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भक्ति मां का जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति केवल मंदिर में पूजा करने तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, त्याग, अनुशासन और मानव कल्याण के प्रति समर्पण में निहित है। उनकी जीवनगाथा आज भी हजारों श्रद्धालुओं को सेवा और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।
इस दुर्लभ और आध्यात्मिक स्थान के दर्शन का श्रेय प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री वर्षा श्रीवास्तव को देते हैं, जिनके माध्यम से श्री हरिश जोशी से मुलाकात हुई। श्री जोशी ने आश्रम की महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए पूरे परिसर का दर्शन कराया। साथ ही भक्ति माँ के सुपुत्र से भी बातचीत का अवसर मिला, जिनसे मोनी माँ के जीवन, सेवा और साधना से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त हुईं। यह यात्रा श्रद्धा, सेवा और बाबा नीम करौली की स्मृतियों से जुड़ा अविस्मरणीय अनुभव रही।
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