​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में आयोजित 'सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प' विषयक वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला में सिंहस्थ-2028 को लेकर राज्य सरकार के विजन और तैयारियों का खाका पेश किया। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि हर 12 साल में होने वाला सिंहस्थ न केवल भारत का, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति, दर्शन, विरासत और अटूट आस्था का महासंगम है। उन्होंने बताया कि इस बार सिंहस्थ को एक नव्य प्रारूप में भव्य, दिव्य और आध्यात्मिक बनाने के लिए सभी प्रबंधन एवं अधोसंरचना विकास के कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं।
​डॉ. यादव ने अधिकारियों, पुलिस प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और स्वयंसेवी संगठनों से टीम वर्क और सेवा भावना के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि "स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ" ही सरकार का मुख्य संकल्प है और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुगम प्रबंधन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं और त्वरित राहत व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
​श्रद्धालुओं की संख्या और घाटों का विस्तार
​मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। मां शिप्रा के जल में 24 घंटे के भीतर करीब 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान कर सकेंगे। इसके लिए 778 करोड़ रुपए की लागत से नदी के दोनों तटों पर 29 किलोमीटर से अधिक लंबाई के नए घाट बनाए जा रहे हैं, जबकि 120 करोड़ रुपए की लागत से पुराने 7.8 किलोमीटर के स्थायी घाटों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी जल परियोजना के माध्यम से शिप्रा नदी में पानी की अविरल उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
​कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर का महाजाल
​श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए उज्जैन और उसके आस-पास के जिलों में वर्तमान में 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्य संचालित हैं।
​रोड कनेक्टिविटी: उज्जैन को चारों दिशाओं से जोड़ने के लिए 6-लेन और 4-लेन सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। इसमें 1,692 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन-इंदौर 6-लेन रोड का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसके अलावा उज्जैन-जावरा मार्ग (5,017 करोड़), उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग (2,935 करोड़), उज्जैन-झालावाड़ (2,523 करोड़), उज्जैन-मक्सी (351 करोड़) और उज्जैन-गरोठ मार्ग (2,660 करोड़) का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
​पुल और यातायात प्रबंधन: आंतरिक मार्गों पर यातायात को सुचारू रखने के लिए 853.46 करोड़ रुपए की लागत से 22 नए पुलों और रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण व चौड़ीकरण किया जा रहा है।
​रेलवे और हवाई यातायात: सिंहस्थ के दौरान 236 विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। उज्जैन सहित 7 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। हवाई मार्ग के लिए उज्जैन-देवास रोड पर 457 एकड़ भूमि पर नया हवाई अड्डा और सदावल में 13.45 करोड़ रुपए की लागत से 4 आधुनिक हेलीपैड बनाए जा रहे हैं।
​डिजिटल और आपदा प्रबंधन
​मेला क्षेत्र की रियल टाइम निगरानी और यातायात नियंत्रण के लिए 139 करोड़ रुपए की लागत से एक 'केंद्रीय डिजिटल कमांड सेंटर' विकसित किया जा रहा है। यह सेंटर एआई (Artificial Intelligence) आधारित भीड़ प्रबंधन और एकीकृत सीसीटीवी निगरानी से लैस होगा।
​मुख्यमंत्री ने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि आगामी सिंहस्थ के लिए जल्द ही विभिन्न समितियों का गठन किया जाएगा, जिसमें हर वर्ग के अनुभवी लोगों को शामिल कर उनके सुझाव लिए जाएंगे। कार्यशाला में स्थानीय जनप्रतिनिधि, उज्जैन कमिश्नर व मेलाधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह सहित पिछले सिंहस्थ में सेवाएं दे चुके कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।