पन्ना : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग शिक्षक मनोज कुमार शर्मा की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। माइग्रेन के असहनीय दर्द से जूझ रहे मनोज गर्ग ने वर्ष 1984 में योग को अपनाया और नियमित अभ्यास से न केवल बीमारी पर नियंत्रण पाया, बल्कि इसे जीवन का उद्देश्य बना लिया। पिछले 24 वर्षों से वे निःशुल्क योग प्रशिक्षण देकर लोगों को स्वस्थ जीवन की राह दिखा रहे हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने समाज सेवा का संकल्प नहीं छोड़ा और योग को जन-जन तक पहुंचाने में जुटे हैं। अब तक वे 10 हजार से अधिक लोगों को योगाभ्यास करा चुके हैं। उनकी कक्षाओं में बच्चे, युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक बड़ी संख्या में भाग लेते हैं।
मनोज गर्ग बताते हैं कि योग ने उनके जीवन को नई दिशा दी और आत्मविश्वास बढ़ाया। इसी अनुभव को समाज के साथ साझा करने के उद्देश्य से उन्होंने निःशुल्क प्रशिक्षण शुरू किया। उनका मानना है कि नियमित योगाभ्यास से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा कई जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचाव संभव है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर उनकी यह यात्रा योग की शक्ति और समाज सेवा के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।